उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण की प्रक्रिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत का बयान इन दिनों खासा सुर्खियों में है, जो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हरक सिंह रावत ने साफ कहा कि पार्टी में किसी का टिकट पहले से तय नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लेकर यह दावा कर रहे हैं कि उनका टिकट फाइनल हो चुका है, जबकि सच्चाई यह है कि “टिकट तो राहुल गांधी का भी फाइनल नहीं है।”
उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस में टिकट उसी नेता को मिलेगा, जो अपनी सीट पर चुनाव जीतने की क्षमता रखता हो। किसी की नजदीकी, सिफारिश या व्यक्तिगत संबंध टिकट का आधार नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पास टिकट के लिए कई सिफारिशें आ रही हैं, लेकिन पार्टी हित में फैसला पूरी निष्पक्षता के साथ लिया जाएगा।
हरक सिंह रावत ने अपने बयान में यह भी कहा, “मैं तो पार्टी का सिपाही हूं। जिस सीट से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा, वहां से मैं खुद मैदान में उतर जाऊंगा। और अगर ऐसा भी नहीं हुआ, तो पार्टी के लिए दरी बिछाने और नारे लगाने का काम करूंगा।”
कार्यक्रम के दौरान लगाए जा रहे नारों को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश अध्यक्ष के समर्थन में नारे लगाना पार्टी के समर्थन में नारे लगाने जैसा है। वहीं, ज्योति रौतेला के पक्ष में नारे लगाने को उन्होंने महिलाओं के समर्थन से जोड़ते हुए बताया।
कुल मिलाकर, हरक सिंह रावत का यह बयान कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर सख्त और प्रदर्शन-आधारित नीति का संकेत देता है, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।